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फिजियोथेरेपी विभाग

भौतिकोपचार विभाग संस्थान के अंतरंग और बहिरंग रोगी विभाग द्वारा निर्दिष्ट किए गए रोगियों को भौतिक उपचार देता है |

विभाग में निम्नलिखित स्टाफ है

प्रदान की जाने वाली सेवाएँ

  1. रोगी देखभाल सेवाएँ एवं विशेष मूल्यांकन |
  2. शिक्षण / प्रशिक्षण |
  3. अनुसंधान |

रोगी देखभाल सेवाएँ एवं विशेष मूल्यांकन

अंतरंग और बहिरंग रोगियों के लिए उपचार कार्यक्रम की योजना संपूर्ण शारीरिक मूल्यांकन के बाद बनाई जाती है और उचित भिन्न उपचारों के आवश्यकतानुसार निम्न अनुभागों में निष्पादित की जाती है |
  1. पीड़ा नियंत्रण अनुभाग |
  2. वयस्क एवं आरोग्यकारक उपचार अनुभाग |
  3. जीवयांत्रिक एवं चाल प्रशिक्षण अनुभाग |
  4. बालरोग विज्ञान अनुभाग |

पीड़ा नियंत्रण अनुभाग

भौतिकोपचार विभाग में रोगियों को भौतिकोपचार रीतियों की सलाह दी जाती है | अनुभाग में विषयनिष्ठ और वस्तुनिष्ठ निर्धारण को ध्यान में रखकर विस्तृत भौतिकोपचार मूल्यांकन किया जाता है | भौतिकोपचार कार्यक्रम हर रोगी की भिन्न आवश्यकतानुसार बनाया जाता है | इसमें रोगियों की शिक्षा, पीड़ा की पुनरावृत्ति की रोकथाम के लिए दक्षता, भौतिक कारक और निश्चित व्यायाम समाविष्ट हैं |

वयस्क एवं आरोग्यकारक उपचार अनुभाग

तंत्रिकाप्रेरक (न्यूरोमोटर) स्थितियाँ जैसे – लकवा, आघात की वजह से मस्तिष्क की चोट, मेरु-रुज्जु की क्षति, गतिशील तंत्रिका मांसपेशियों के विकार आदि से पीड़ित वयस्कों का मूल्यांकन किया जाता है और भौतिकोपचार , पुनर्वास विशेषज्ञ एवं पुनर्वास टीम सदस्यों के साथ मिलकर एक चिकित्सीय योजना बनाई जाती है और रोगियों के लिए उनकी अपनी-अपनी आवश्यकतानुरूप लक्ष्य बनाये जाते हैं | बनाए गए लक्ष्यों को दृष्टि में रखते हुए लागू करने योग्य भौतिक चिकित्सकीय उपचार का चयन करके क्रियान्वित किया जाता है |शल्यक्रिया के बाद भौतिकोपचार का लक्ष्य है, कार्यक्षमता को बढ़ावा देना, जिसके लिए विशेष मूल्यांकन तथा प्रशिक्षण से सहायता दी जाती है | दीर्घकाल से भर्ती हुए रोगियों के लिए वॉर्ड से संलग्नित हॉल में व्यायाम उपचार की सुविधा है |

जीवयांत्रिक एवं चल प्रशिक्षण अनुभाग

विकलांग व्यक्तियों की चाल तथा गतिक्रिया का मूल्यांकन (उपकरणों के साथ या उपकरणों के बिना) चाल और उपयुक्त उपकरण के चुनाव और उसके प्रयोग को ध्यान में रखते हुए विश्लेषण किया जाता है | चाल और गतिक्रिया में सुधार हेतु प्रशिक्षण से पहले चिकित्सीय व्यायामों का प्रयोग किया जाता हैं |

बालरोग विज्ञान अनुभाग

आर्थोपेडिक एवं तंत्रिका प्रेरक (न्यूरो मोटर) के कारण से पीड़ित बच्चों का मूल्यांकन किया जाता है और कार्यों में अधिकतम आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को ध्यान में रखकर भौतिक उपचार की योजना बनाई जाती है और जहाँ भी आवश्यक हो, सहायक सामग्री और उपकरणों के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है | माता-पिता को भी बच्चों के उपचार प्रबंधन में शामिल किया जाता है और घर पर क्रियात्मक प्रशिक्षण और सहायक सामग्री और उपकरणों को पहनाना, उतारना तथा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है | इसके अतिरिक्त, भौतिकोपचार विभागीय स्टाफ संस्थान द्वारा संचालित आऊटरिच (दूर तक पहुँचने वाले) सेवा कार्यक्रमों को अंजाम देने वाले दल का हिस्सा बनते है, जहाँ भौतिक चिकित्सा सेवाएँ अपेक्षित हैं – जैसे – विकलांगता शिविर एवं पुनर्वास शिविर |

विशिष्ट मूल्यांकन

भौतिकोपचार विभाग में निम्नलिखित विशिष्ट मूल्यांकन किए जाते हैं जो कि चिकित्सा एवं अन्य उपचारों के आधार बनते है

  1. यांत्रिक चाल विश्लेषण |
  2. पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट |
  3. आइसोकाइनेटीक व्यायाम परीक्षण |
  4. यांत्रिक संतुलन मूल्यांकन |
  5. व्यायाम सहनशक्ति परीक्षण (एक्सरसाईज टोलरंस टेस्टिंग) एवं स्पायरोमेट्री |
  6. विकलांगता मूल्यांकन |
  7. इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल विश्लेषण (स्टडीज) |

शिक्षण / प्रशिक्षण

  1. भौतिकोपचार (एम पी टी एच) में स्नातकोत्तर डिग्री का (द्विवर्षीय) पाठ्यक्रम, महाराष्ट्र आरोग्य विज्ञान विद्यापीठ, नाशिक से संबद्धित है | इसमें प्रत्येक वर्ष 6 विद्यार्थियों को भर्ती किया जाता है |
  2. पुनर्वास भौतिकोपचार में फेलोशिप पाठ्यक्रम, महाराष्ट्र आरोग्य विज्ञान विद्यापीठ, नाशिक से संबध्दित है | इसमें प्रत्येक वर्ष 10 विद्यार्थियों को भर्ती किया जाता है |

अनुसंधान गतिविधियाँ

विभाग में नियमित आधार पर अनुसंधान का संचालन किया जाता है | विभागों के प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा मार्गदर्शित अनुसंधान परियोजनाओं को आयोजित करके विश्वविद्यालय को प्रस्तुत किया जाता है | इस पर आधारित वैज्ञानिक लेख राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों में प्रस्तुत किए जाते हैं | अनुसंधान के कुछ क्षेत्र निम्नलिखित हैं :
  1. विभिन्न तंत्रिका-पेशीय कंकालीय विकारों पर भौतिकोपचार उपाय का प्रभाव|
  2. संतुलन मूल्यांकन एवं सामान्य वयोवृद्ध जनसंख्या के साथ-साथ तंत्रिका-पेशीय कंकालीय विकारों से पीड़ित व्यक्तियों को प्रशिक्षण |
  3. चाल विश्लेषण |
  4. चिकित्सीय जीव प्रतिक्रिया |
  5. विकलांग व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता का अध्ययन |