अ. भा. भौ. चि एवं पु सं - के बारे में
सन 1955 में स्थापित अखिल भारतीय भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास संस्थान, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास के क्षेत्र में शीर्ष संस्थान है | |
उत्पत्ति :
यह संस्थान संयुक्त राष्ट्र संगठन से तकनीकी विशेषज्ञता एवं मानव शक्ति की सहायता एवं भारतीय विशेषज्ञ स्वर्गीय डॉ एम. वी. संत की योजना एवं सहयोग से 1955 में अग्रगामी परियोजना के रूप में स्थापित किया गया था । सन 1961 में संस्थान को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में ले लिया गया | |
सन 1959 में भूतपूर्व प्रधानमंत्री, स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने इसकी मार्च 1959 में एक नई पांच मंज़िला इमारत की आधारशिला रखी । मार्च 1976 में तत्कालीन स्वास्थ्य एवं परिवार योजना के संघ मंत्री डॉ. करण सिंह द्वारा इस इमारत का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया ।
सन 2000 में मुख्य ब्लॉक (‘ए’ ब्लॉक) की आधारशिला डॉ. सी. पी. ठाकुर, संघ मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रखी गई । इस इमारत का सन 2006 में डॉ. ए. रामदास , संघ मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा उद्घाटन किया गया |
समय के साथ यह संस्थान एक आधुनिक सुसज्जित पुनर्वास केंद्र में परिवर्तित हो गया है। इसके मुख्य ब्लॉक में बहिरंग रोगी विभाग, सर्व तकनीकी कला संपन्न शल्यागार, शल्यक्रिया उपरान्त सुधार कक्ष, उच्च तकनीकी प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स निर्माण विभाग, उन्नतिशील भौतिक चिकित्सा सेवाएँ, चिकित्सकों के कक्ष ,छात्रावास एवं अतिथि कक्ष शामिल हैं | |
अन्य दो ब्लॉक में भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग है | जिसमें रोगियों के लिए साठ बिस्तरीय सुविधा, पुनर्वास चिकित्सा विभाग सहित व्यावसायिकोपचार , भौतिकोपचार ,वाकोपचार , चिकित्सा समाज सेवा, व्यावसायिक मार्गदर्शन, शैक्षणिक अनुभाग, हिंदी विभाग, पुस्तकालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण विभाग एवं प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स कार्यशाला शामिल हैं | इस ब्लॉक के विकृति विज्ञान एवं विकिरण विज्ञान विभाग में रोगियों के निदान एवं प्रबंध हेतु जाँच की सुविधा भी उपलब्ध है | छात्रावास की कुछ सुविधाएं भी इन ब्लाक में दी गयी हैं । |
यह संस्थान केवल देश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि कुछ अन्य देशों में भी गति विकलांग संबंधी विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों को व्यापक पुनर्वास चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने के लिए विख्यात है | अखिल भारतीय भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास संस्थान पुनर्वास चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करनेके साथ –साथ इस क्षेत्र में मानव शक्ति को प्रशिक्षण देने एवं अनुसंधान का संचालन करने के लिए प्रतिबद्ध है | |
दूरदर्शिता
- चलन विकलांग संबंधी विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए समान अवसर प्रदान करना, उनके अधिकारों की रक्षा एवं समाज में उनकी सहभागिता हेतु उनकी अंतर्निहित शक्ति को कार्यान्वित करना |
लक्ष्य
- चलन विकलांगता संबंधी विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों की चिकित्सीय आवश्यकताओं के अलावा गुणवत्तापूर्वक इलाज द्वारा उन्हें अधिकतम सक्षम करना, ताकि उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त हो, पुनर्वास व्यावसायिकों को प्रशिक्षित करना एवं अनुसंधान करना ||
उद्देश्य
- न्यूरो-मस्क्यूलो-स्कैलेटल विकारों और पुरानी बीमारियों के सभी प्रकारों के लिए व्यापक चिकित्सा पुनर्वास सेवाओं को सृजित करना एवं प्रदान करना |
- बहुआयामी दृष्टिकोण के माध्यम से विकलांगता रोक-थाम एवं पुनर्वास पर जोर डालते हुए सेवाएँ सृजन एवं प्रदान करना |
- पुनर्वास व्यावसायिकों को अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठयक्रम एवं दीर्घकालिक स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम द्वारा प्रशिक्षित करना |
- समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना |
- सहायक सामग्री एवं उपकरणों का निर्माण |
- भौतिक चिकित्सा पुनर्वास के क्षेत्र में अनुसंधान करना |
- समय-समय पर पुनर्वास सेवाओं की पड़ताल करने हेतु सरकार एवं गैर-सरकारी संगठन के साथ सहयोग एवं समन्वय करना |
संस्थान में प्रदान की जाने वाली सेवाएँ
- जन्मजात, जन्म से चोट, संक्रमी, चयापचयी, अभिघातज, आनुवंशिक एवं बढ़ती आयु के कारण व्यपजनन के विकारों के परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार की शारीरिक विकलांगताओं के लिए सेवाएँ प्रदान की जाती हैं |
कुछ विकलांग स्थितियां जिनके लिए संस्थान में पुनर्वास प्रबंधन उपलब्ध है
- बाल-रोग विज्ञान नामतः प्रमस्तिष्कीय आघात, पोलियो के उपरान्त अवशिष्ट पक्षाघात, जन्मजात विसंगति, जोड़ों का टेढ़ापन, मेरुरज्जुतानिका-हर्निया, अस्थिवक्रता, पेशीय अपविकास इत्यादि ।
- न्युरोलोजिकल नामतः अर्द्धाग पक्षाघात, सिर की चोटें, कंपनयुक्त अंगघात, बहु-स्कलेरोजिंग, पैरीफ्रल तंत्रिका विकृति, गतितन्त्रिकाकोशिका बीमारी, मेरु-रज्जू चोट |
- विकलांग विज्ञान, नामतः सर्वाइकल एवं लम्बर स्पोण्डीलोसिस, ऑस्टियोपोरोसिस, अस्थिभंग उपरान्त विकार, जोड़ों की दर्दयुक्त स्थिति पैरीफ्रल तंत्र चोट, पथर्स रोग, स्कोलियोसिस, कुब्जाता (क्यफोसिस), कुष्ठता के परिणामस्वरूप विकार, मधुमेह की जटिलताएँ, बर्न काण्ट्रैक्चर |
- एम्पुटेशन : जन्मजात और जन्मोत्तर |
- आर्थराइटिक : अस्थिसन्धिशोध, रिह्युमेटॉयड, आर्थराइटिस, सेप्टिक आर्थराइटिस, एंकीलोसिंग स्पोण्डीलोसिस |
- वाक् – विलंबित वाक् एवं भाषा विकास दुरुच्चारण, वाचाघात |
- खेलकूद के दौरान लगी चोट |