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अनुसंधान एवं विकास विभाग

research

अखिल भारतीय भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास संस्थान विज्ञान एवं तकनीक विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त देश के संस्थानों में से एक है | संस्थान स्टाफ और विद्यार्थियों में चिकित्सा पुनर्वास के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहन देता है एवं प्रचारित करता है | चिकित्सा एवं शल्य-क्रियात्मक तकनीकों के क्षेत्र में नई परियोजनाएँ चलाई जाती हैं | वातावरण के साथ-साथ विकलांगता सामाजिक और मानसिक पहलुओं की, उपयुक्तता के अनुसार चिकित्सीय हस्तक्षेप तथा विकलांगों के अपने माहोल में उनके सामाजिक और मानसिक पहलुओं को ध्यान मे रखते हुए, उपयुक्तता अनुसार सहायक सामग्री एवं उपकरणों के निर्माण में, नये डिजाइन एवं सामग्री ने तकनीक में उन्नति करने में सहयोग किया हैं | विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (आई.सी.एम्.आर.आई.आई.टी.,) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय, तथा गैर-सरकारी संगठनों के साथ की गयी सहायक अनुसंधान परियोजनाएँ, अनुसंधान एवं विकास की गतिविधियों में कुछ प्रमाण हैं | संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों एवं शहरी मलिन बस्तियों में समुदाय आधारित-पुनर्वास (सी बी आर) में अनेक सहायक अनुसंधान परियोजनाओं को लागू करने में सहायक रहा है | संस्थान विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थित एवं अखिल भारतीक भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (2010-11) द्वारा आयोजित समुदाय आधारित-पुनर्वास के संबंध में परिधिस्थ स्वास्थ्य कामगारों के लिये प्रशिक्षण पुस्तिका को रचना में कार्यान्वित रहा | कामगार हेतु प्रशिक्षण मापदंड के विकास में लगा हुआ है |

इनमें उल्लेखनीय हैं

  1. देश के पांच जिलों – रायगढ – (महाराष्ट्र) दुर्ग-(मध्यप्रदेश) थ्रिसुर-(केरला) इरोडा-(तमिलनाडू) चितौर-(आंध्रप्रदेश) में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की परियोजना “चिकित्सा पुनर्वास पर अग्रगमी परियोजना” लागु की गई | 1995-2001. स्वास्थ्य सेक्टर द्वारा ‘समुदाय-आधारित-पुनर्वास’ पर आरंभ की गई यह प्रथम राष्ट्रिय परियोजना थी| इसमें नोडल एजंसी के रूप में संस्थान क्रियान्वित रहा |
  2. वर्ष 2004-05 में रायगढ़ जिले स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य--केंद्र पोयनाड (महाराष्ट्र), में चिकित्सा-पुनर्वास-सेवाओं की पहुँच द्वारा विकलांगों को समुचित सक्षम बनाने के लिए परियोजना चलाई गई |
  3. विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग द्वारा अलिबाग-रायगढ़ जिले में जिला अस्पताल की पुनर्वास इकाई की स्थापना |
  4. रोटरी क्लब मुंबई, वर्ली के सहयोग से मुंबई के ‘एच’ ईस्ट वार्ड में “मोबाइल डोमिसिलियरी पुनर्वास परियोजना |”
  5. 2008-09 में एम सी जी एम के सहयोग से एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थित एस (डब्ल्यू) वार्ड में “मुंबई शहरी बस्तियों में अग्रगामी परियोजना |”
  6. समुदाय पर आधारित पुनर्वास दृष्टिकोण (जागरुकता, रोकथाम कार्यनीति, छानबीन एवं परामर्श) के संबंध में परिधिस्थ स्वास्थ्य कर्मचारीयों के लिए प्रशिक्षण मापदंड का विकास (2010-2011) |

संस्थान द्वारा लागू की गई कुछ अन्य केन्द्रीय अनुसंधान परियोजनाएँ

सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय के सहयोग से

  1. मधुमेह पीड़ितों के लिये फुटवियर एवं फुटकेयर|
    • मयोइलैक्ट्रिक कृत्रिम हाथ |
    • मोड्यूलर मोडिफाइड फ्लेक्स फूट |
  2. पंचशील विकलांग न्यास के सहयोग से “चलन संबंधी विकलांगता से ग्रस्त बच्चों के लिए बैठने के उपकरण एवं गतिशील सहायक सामग्री” |